फिल्म इस विचार पर चर्चा करती है कि कैसे दमनकारी शासन व्यवस्थाएं इंसानी शरीर को केवल एक वस्तु या 'कमोडिटी' के रूप में देखती हैं। कलात्मक विरोध: